मेरी बर्बादी
का कोई इश्तिहार छपवाओ,
पहले पे उसमें प्यार छपवाओ,
दूसरे पे अन्धा एतबार लिखवाओ,
तीसरे पे यार मददगार बताओ,
चौथे पे बेशुमार खुमार लिखवाओ,
पांचवे पे लिखो उसमें कसमें,
छठे पे लिखो हालातों के बस में,
सातवें पे लिखो किए काम गैर जरूरी,
आठवें पे लिखो रहबरों से दूरी,
नवें पे लिखो ख्यालों का भटकना,
दसवें पे लिखो मायूसी न झटकना,
जाओ ये छपवाओ और हर
नुक्कड़ हर गली में चिपकाओ,
जो पड़ नहीं सकते उनकी
इतलाह के लिए डोल बजा के गाओ,
तां की फिर कोई खराब न हो सके,
सब करके भी यूं बर्बाद न हो सके!
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