पूछ के जाते तो क्या गौतम बुद्ध हो पाते?
अपने प्रियजन से क्या कभी अनुमति पाते?
सब उनको वानप्रस्थ की त्रुटियां गिनाते,
सब उनको कर्तव्य और मोह में बांधना चाहते,
पूछ के जाते तो क्या गौतम बुद्ध हो पाते?
ज्यादा से ज्यादा होता भी तो क्या?
कहते उनसे रहो महल में ही दिन भर,
साथ में ये कुटिया में खोजो मार्ग जी भर कर,
राज छोड़ राजकुमार वन नहीं जाते,
पूछ के जाते तो क्या गौतम बुद्ध हो पाते?
और गौतम न इधर के न उधर के,
न सुख महल के अंदर, न शांति कुटिया के अंदर,
बस द्वंद्व द्वंद्व में ही शायद नष्ट हो जाते,
पूछ के जाते तो क्या गौतम बुद्ध हो पाते?