किसी को अच्छा बनाना है
तो किसी को बुरा होना पड़ेगा,
कोई अपनी मंज़िल पा सके
किसी को सपना खोना पड़ेगा,
दुनिया को मिल सकें
सिकंदर और चंद्रगुप्त,
किसी को अरस्तू, किसी को
विष्णुगुप्त होना पड़ेगा,
ले मैं तेरी दर-ओ-दिवार
बनता हूँ, जा, तू छू
ले आसमान, तुझे ये हक़
अदा करता हूँ,
जा, तू बीज दे वक़्त के
खेत में अपने सपनों
की फ़सलें, ले, मैं
तेरे लिए दरिया बनता हूँ,
सपना धरती का सच होने
के लिए, किसी को चाँद,
किसी को सूरज होना पड़ेगा।