Ese layi asin chatt te sona chadd ditta

(Original song is Eise layi rona chad ditta by Atif Aslam movie Mel Kraade Rabba)

Saanu kothe manjhe daake son da bada chaa,
sochi naa khyaal asion dilon kad taa,
Saanu kothe manjhe daake son da bada chaa,
sochi naa khyaal asion dilon kad taa,
par chandra meenh roj jaanda aa,
ese layi asin chatt te sona chadd ditta,
ese layi asin chatt te sona chadd ditta,
ese layi asin chatt te sona chadd ditta,
kin min kin min meenh penda rehnda eh
chandra saanu eh son na denda eh
kin min kin min meenh penda rehnda eh
chandra saanu eh son na denda eh

meenh ve..................... meenh ve........

asin kamre ch hi cooler laa ke sauna... sikh liya
light gayi macchran naal vi raat bitauna .. sikh liya
light gayi macchran naal vi raat bitauna .. sikh liya
tere ton darde na utte hunde jaa
hun taan khyaal vi asin dilon kad ditta
chandra meenh roj jaanda aa,
ese layi asin chatt te sona chadd ditta,
ese layi asin chatt te sona chadd ditta,
ese layi asin chatt te sona chadd ditta,

raataan jinniaa sutte utte bade laye nzaare,
chaani raat te taare bade lagde si pyaare,
chaani raat te taare bade lagde si pyaare,
par hun taan rehndi badlaan di chaanh,
par hun taan rehndi badlaan di chaanh,
manja utte asin chadauna chadd ditta,
chandra meenh roj jaanda aa,
ese layi asin chatt te sona chadd ditta,
ese layi asin chatt te sona chadd ditta,
ese layi asin chatt te sona chadd ditta,
kin min kin min meenh penda rehnda eh
chandra saanu eh son na denda eh
kin min kin min meenh penda rehnda eh
chandra saanu eh son na denda eh

meenh ve..................... meenh ve........

इतना दियो हो साहिब जी, अब रक्खा न जाए संभाल कर

इतना दियो हो साहिब जी,
अब रक्खा न जाए संभाल कर,
निर्धन को राजा कर दियो,
प्रेम का मोती झोली डाल कर,
इतना दियो हो साहिब जी...

तुझको ही भजती रहती दिन रात,
मन ही मन करती रहती तुझसे बात,
लगता के जैसे तुम बुला रहे,
जब चिडिया कोई बोले डाल पर,
इतना दियो हो साहिब जी....

अब मन में मोरे कोई दुविधा नहीं,
अब जियरा को भी कोई चिंता नहीं,
जानूं लगा दोगे पार बांह पकड़ कर,
चलती हूँ आश्वस्त हो हर राह पर,
इतना दियो हो साहिब जी....

तोहरी करुणा का पातर बनी रही हूँ,
बस इतनी ही तो से मैं विनती करूँ,
रहना यूं ही तुम हर दम अंग संग मेरे,
छोड़ न जाना मुझे मेरे हाल पर,
इतना दियो हो साहिब जी....

पर माँ बदले में कुछ भी चाहती नहीं है, सिर्फ एक वही जो कभी जताती नहीं है!

बाकी सब कभी न कभी जता देते हैं,
दिया जो सब कुछ उसके बदले मांग लेते हैं,
पर माँ बदले में कुछ भी चाहती नहीं है,
सिर्फ एक वही जो कभी जताती नहीं है!

घर जाओ, सब के लिए कुछ ले जाओ,
उसे चाहे तुम हर बार भूल जाओ,
मेरे लिए क्यों कुछ लेके नहीं आया,
बात उसकी तरफ से फिर भी कभी,
बनके ताना ये आती नहीं है,
माँ बदले में कुछ भी चाहती नहीं है,
सिर्फ एक वही जो कभी जताती नहीं है!

पती के बाद खाती इसलिए अगर है,
क्योंकि वो उसके लिए परमेशवर है,
तो बच्चों से पहले क्यों खाती नहीं है?
क्यों उसे रोटी उनसे पहले भाती नहीं है?
बच्चे उससे पहले खा लें तो खा लें,
पर वो बच्चों से पहले कभी खाती नहीं है,
माँ बदले में कुछ भी चाहती नहीं है,
सिर्फ एक वही जो कभी जताती नहीं है!

कुछ भी मुश्किल हो, या कुछ भी हो बात,
कोई और हो न हो वो हर पल रहती साथ,
हसके मांग लेती है सब बलाएं अपने सर,
मिलेगा कुछ बदले में उसे नहीं ये फिकर,
जान देने तक से भी घबराती नहीं है,
माँ बदले में कुछ भी चाहती नहीं है,
सिर्फ एक वही जो कभी जताती नहीं है!

बच्चे चाहे उसे जाने अनजाने कितना दुःख दे,
पर कहती नहीं फिर भी कभी कुछ मुख से,
हाँ रो लेती है बस कभी वो सब से छुपके,
पर दिल में फिर भी कभी बददुआ लाती नहीं है,
ऊँचा बोल बच्चों का दिल कभी दुखाती नहीं है,
माँ बदले में कुछ भी चाहती नहीं है,
सिर्फ एक वही जो कभी जताती नहीं है!

बच्चे चाहे उसे कभी याद करे न करे,
उसका नहीं होता ध्यान उनसे पल भी परे,
भले हों, बुरे हों, हों चाहे जैसे,
जग समजता हों उन्हें चाहे भी कैसे,
निंदा उसे फिर भी उनकी सुहाती नहीं है,
ममता उसकी उनकी लिए जाती नहीं है,
माँ बदले में कुछ भी चाहती नहीं है,
सिर्फ एक वही जो कभी जताती नहीं है!

ਇੱਕਲੇ ਬੰਦੇ ਦਾ ਗੁਜਾਰਾ ਨਹੀਂ!

ਇਕੱਲਾ ਰੁੱਖ ਤਾਂ ਖੜਾ ਰਿਹ ਸਕਦਾ,
ਇਕੱਲਾ ਬੁੱਤ ਵੀ ਸਭ ਸਿਹ ਸਕਦਾ,
ਪਰ ਜਿੰਦਗੀ ਤੋਂ ਪਾਰ ਉਤਾਰਾ ਨਹੀਂ,
ਇੱਕਲੇ ਬੰਦੇ ਦਾ ਗੁਜਾਰਾ ਨਹੀਂ!

ਦਿਲ ਦਿਆਂ ਕਦ ਤੱਕ ਦਿਲ ਚ ਰਿਹਣ,
ਬੁੱਲ ਦਾ ਜੀ ਹੁੰਦਾ ਕਿਸੇ ਨੂ ਕਿਹਣ,
ਬਿਨਾ ਕਹੇ ਭਾਰ ਤੋਂ ਛੁਟਕਾਰਾ ਨਹੀਂ,
ਇੱਕਲੇ ਬੰਦੇ ਦਾ ਗੁਜਾਰਾ ਨਹੀਂ!

ਮਨ ਹੋਲਾ ਹੋ ਲੈਂਦਾ ਡੋਲ ਪਾਣੀ ਖਾਰਾ,
ਤਨ ਨੂ ਬੁਹਤ ਹੈ ਥੰਮਾ ਦਾ ਸਹਾਰਾ,
ਪਰ ਰੂਹ ਨੂ ਰੂਹ ਬਿਨ ਚਾਰਾ ਨਹੀਂ,
ਇੱਕਲੇ ਬੰਦੇ ਦਾ ਗੁਜਾਰਾ ਨਹੀਂ!

ਵਾਟਾਂ ਲੰਮੀਆਂ ਬੁਹਤ ਨੇ ਐਵੇਂ ਲੱਗਦਾ,
ਇਕੱਲੇ ਪੈਰ ਪੈਂਡਾ ਮੀਲ ਵਾਂਗੂ ਟੱਪਦਾ,
ਕਿਸੇ ਦਾ ਸਾਥ ਜੈਸਾ ਨਜ਼ਾਰਾ ਨਹੀਂ,
ਇੱਕਲੇ ਬੰਦੇ ਦਾ ਗੁਜਾਰਾ ਨਹੀਂ!

बस इसीलिए थोडा उदास हूँ आज

एक खाब था जो कल मैंने देखा था,
उस खाब में मैं था, वो थी, एक घर था,
और घर के आँगन में एक बच्चा था,
जो उछलते खेलते कूदते हुए,
कभी मुझसे आ लिपटता था,
कभी उससे जा लिपटता था,
और मैं कभी उसे देखता था,
कभी उस बच्चे को देखता था,
और दोनों को देख देख कर
मेरा जी न भरता था,
और हर आती जाती सांस में मैं,
कई लाख बरस जीने की तमन्ना करता था,
हर सांस लग रही थी मुझे
खुदा की जैसे इनायत कोई,
मैं फूला न समा रहा था,
के मेरी साधना सफल हो गई,
पर फिर अचानक सुबह हो गई,
खाब न रहा मेरी नींद खुल गई,
बसी बसाई जैसे दुनिया उजड़ गई,
बस्ती कोई जिसे आग निगल गई,
कश्ती कोई जिसे सुनामी बहा ले गई,
बिजली कोई जैसे बादलों से निकलकर,
मेरे उस घर को खंडहर कर गई,
और मैं बस खड़ा देखता रह गया,
हकीकत सब खुशियाँ चुरा ले गई,
और दिल के सहरा से उठी,
दर्द भरी चाहे आंधियाँ कई,
पर मेरे होंठ जैसे सिल गए थे,
उनको चाहकर भी पुकार सके नहीं,
और मैं लाचार पड़ा रहा आपना बिस्तर में,
जैसे मेरे जिस्म में बाकी जान ही ना रही,
और फिर सब दर्द बन के आंसूं,
आँखों के रस्ते बह गया,
हकीकत के आगे हसीं सपने का मोल,
कुछ बूँद खारा पानी रह गया,
बस इसीलिए थोडा उदास हूँ आज,
मैं पुहँच गया था वहां तक,
आरज़ू बसी है जिसकी मेरे रोम रोम तक,
पर हकीकत ने ला कर पटक है दिया,
मुझे फिर से वही,
जहाँ मैं जी रहा हूँ तनहा बेमानी जिंदगी,
जिसकी मुझे कोई चाहत ही नहीं!

ਕੈਮਰਾ

ਹਰ ਇੱਕ ਅੱਖ
ਇੱਕ ਕੈਮਰਾ ਵੀ ਹੁੰਦੀ ਹੈ,
ਜੋ ਪਲਕਾਂ ਦੇ ਸ਼ਟਰ ਖੋਲ ਕੇ,
ਟਕਟਕੀ ਬੰਨ ਕੇ,
ਕੀਤੇ ਨਾ ਕੀਤੇ,
ਫ਼ੋਕਸ ਕਰ ਰਹੀ ਹੁੰਦੀ ਹੈ,
ਤੇ ਹਰ ਚੰਗੇ ਮੰਦੇ ਦਰਿਸ਼ ਨੂ,
ਯਾਦਾਂ ਚ ਮਿਹ੍ਫੂਸ ਕਰਨ ਲਈ,
ਦਿਲ ਦੀ ਆਹ ਵਾਹ ਤੇ,
ਕਲਿਕ ਕਰ ਰਹੀ ਹੁੰਦੀ ਹੈ,
ਤੇ ਰਿਕੋਰਡ ਕਰਦੀ ਰਿਹੰਦੀ ਹੈ,
ਦਿਮਾਗ ਦੀ ਰੀਲ ਤੇ,
ਤੇ ਫਿਰ ਜਦੋਂ ਵਿਹਲ ਹੁੰਦੀ ਹੈ,
ਸੁਫਨਿਆ ਦੇ ਡਾਰਕ ਰੂਮ ਚ,
ਕੁਛ ਚੋਣਵੀਆਂ ਯਾਦਾਂ ਨੂ,
ਭਾਵਾਂ ਦੇ ਕਾਗ਼ਜ਼ ਤੇ ਪ੍ਰਿੰਟ ਕਰਕੇ
ਤੇ ਦਿਲ ਦੇ ਕੋਨਇਆ ਚ,
ਜਿਥੇ ਕਿਥੇ ਜਗਹ ਮਿਲਦੀ ਹੈ,
ਫਰੇਮ ਕਰਕੇ ਟੰਗਦੀ ਰਿਹੰਦੀ ਹੈ,
ਇਸੇ ਕਰਕੇ ਹੀ ਮਿਤਰਾਂ ਪਿਆਰਿਆਂ,
ਸੋਹਣੇ ਯਾਰ ਦੀ ਝਲਕ ਦੇ ਨਜ਼ਾਰਿਆਂ,
ਨੂ ਮੁੜ ਮੁੜ ਦੇਖਣ ਲਈ,
ਕਿਸੇ ਕਾਗਜ਼ੀ ਤਸਵੀਰ ਦੀ ਲੋੜ ਨਹੀਂ ਹੁੰਦੀ,
ਕਿਓਂਕਿ ਅੱਖ ਦੇ ਕੈਮਰੇ ਨੇ,
ਹਰ ਤਸਵੀਰ ਖਿੱਚ ਕੇ,
ਦਿਲ ਦੇ ਕਮਰੇ ਚ ਫਰੇਮ ਕਰਕੇ,
ਟੰਗ ਰੱਖੀ ਹੁੰਦੀ!

पटरियां

रेल की पटरियां जब कभी टेडी हो जाती हैं,
हथोडों से मार मार कर सीधी की जाती हैं,
तांकि रेल पलट न जाए, हादसा न हो जाए,
और हम भी पटरियां हैं जिन पर जिंदगी दोड लगाती है,
भटक जाने पर ग़म के हथोडों से जो सीधी की जाती हैं,
तांकि ऐसी मुश्किल न पड़ जाए, के जिंदगी ख़तम हो जाए!