तू खुश हो तेरे रास्ते में इतने पत्थर हैं

तू खुश हो तेरे रास्ते में
इतने पत्थर हैं, के बुहत हैं
तुझे फौलाद बनाने के लिए,

वरना लोग पैसा दे के जाते हैं
कसरत खानों में,
जिस्म को लोहा बनाने के लिए!

खुदा की इस को भी
तू एक इनायत ही समझ,
तुझे कुछ न दिया,

तुझे आज़ाद रखा
उसने, जो जी चाहे,
उस पे बाज़ी लगाने के लिए!

अपनी ही आंखों के
आंसू पी के तूने कई रातें
अपने पेट की आग बुझाई है,

तू खुश किस्मत समझ
अपने आप को, तू तयार है
किसी भी सफर पे जाने के लिए!

और ज़माने की ठोकरें,
रास्ते की मुश्किलें,
ये सब तेरी कमाई है,

लोग मारे मारे फिरते हैं
रहबरों की तलाश में,
रास्ता, रोशनी पाने के लिए!

अच्छे वक़्तों में रखेंगे तुझे
सादा, बुरे वक़्तों में करेंगे
ये वक़्त तेरी रहनुमाई,

तू जानता होगा उठा है तो
गिर सकता है, गिरा है तो
क्या चहिये उठ जाने के लिए!

अगर तुझे कोई मिलता है चाहने वाला

अगर तुझे कोई मिलता है
चाहने वाला ज़माने को ठुकरा के,
तो बेखौफ हो के कीमत
उस मोती के लिए चुका दे,

ये ज़माना तो कभी किसी का
ना हुआ और न होगा,
तू अपने दिल को
महफूस रखने के लिए
उस दिल को आशियाना बना ले!

चाहत अपने उरूज़ पे थी

चाहत अपने उरूज़ पे थी,
तो दिल में ख्याल ये भी था,
अपना घर जला के भी,
रखेंगे उसकी राह रोशन,
चाहे वो हमसे ना-आशना ही सही!

ਹੋਵੇ ਦਿਲ ਉਦਾਸ ਤਾਂ

ਹੋਵੇ ਦਿਲ ਉਦਾਸ ਤਾਂ ਖੜਕਾ ਲਵੀਂ ਸਾਡਾ ਆ ਕੇ ਬੂਹਾ,
ਮੁਮਕਿਨ ਹੈ ਤੈਨੂੰ ਏਥੋਂ ਉਮੀਦ ਤੇ ਆਸ ਮਿਲੇ!

तू भी कोई फरिश्ता नहीं, मैं भी कोई खुदा नहीं

तू भी कोई फरिश्ता नहीं,
मैं भी कोई खुदा नहीं,
बस इतना याद रखना,
अपनी खूब निभेगी!

गलतियाँ होँगी माफ करना,
मुसीबतें होँगी एतबार करना,
चलना सबब-ए-एहतराम से,
यकीनन कभी न टूटेगी!

बुरे वक़्तों को करके याद,
करना न कभी आज बर्बाद,
थोड़ा बचते बचाते चलना,
लाजिम है रवाँ गुजरेगी!

और ज़िन्दगी है ये फानी,
कुछ तयशुदा लम्हों की कहानी,
बढ़ना हमेशा ये सोच के,
मुमकिन खिज़ा न खलेगी!

तू भी कोई फरिश्ता नहीं,
मैं भी कोई खुदा नहीं....

तन्हाई में यूं हर कोई अपना हो जाता है

शहर छोड़ के 
कोई भी जाता है,
घर मेरा सूना हो जाता है,

आलम में तन्हाई में
यूँ ना चाहते हुए
हर कोई अपना 
हो जाता है!

आलम-ए-तन्हाई से उकताकर

था कैद में तो,
कभी उसे मरने का
ख्याल ना आया,

ज़िन्दगी चाहे
उसकी जैसी भी थी,

रिहाई हुई तो
आलम-ए-तन्हाई
से उकताकर उसने
खुदकुशी कर ली!