मैं दुनिया से चाह के भी कभी कोई फरेब नहीं कर सकता

मैं दुनिया से चाह के भी कभी कोई फरेब नहीं कर सकता,

पर अच्छा बनने के लिए अपने को तबाह भी नहीं कर सकता,


कर लेता हूँ बाल काले जो वक़्त ने कर दिए हैं कुछ सुफेद,

सबकी नज़र देखती है जो उसे नज़र अंदाज़ नहीं कर सकता,


मैं बेवजह की बहस, नुक्ताचीनी और दलीलों में नहीं पड़ता,

पर हाँ जहाँ हल हो सकता है वहाँ कोशिश जरूर हूँ करता,


ये बात भी अब सीख ली है हर जगह बोलना ठीक नहीं है,

लाख कोई चाहे उक्साए बहकाए मैं अब हामी नहीं भरता, 


मैंने देख लिया अब तो कई बार दुनिया का ये सब खेल,

खुदगर्ज़ हो जहाँ सब, खुदगर्ज़ होने से अब नहीं कतरता,


शायद इसे ही ज़िन्दगी की समझ और दुनियादारी कहते हैं,

हैं और भी राज़ मेरे सब सब किसी को जाहिर नहीं कर सकता! 

चालबाज

तबियत का बड़ा ही है वो नासाज़ आदमी,

बोलता है हस के पर है वो चालबाज आदमी,


क्या बताएं कैसी कैसी बे बुनियाद बातें करता हैं,

मुझे तो लगता है अक्ल का है वो खराब आदमी,


आज कुछ, कल कुछ, सामने कुछ, पीछे कुछ,

ऐसा है जमीर और जेहन का वो बीमार आदमी,


उसके तो घर के अब नहीं करते उसका यकीन,

मैं फसा उसके झांसे में बेबस मोहताज आदमी,


आज भी सपनों में खौफ बन के आ जाता है वो,

राधे राधे करता हुआ शकुनि सा दिमाग आदमी!

ग़ज़ल

दहकते अंगारों पे कभी भी हाथ मत रखना,

उसकी बात पे कभी अपनी बात मत रखना,


नाकाम इश्क़ आखिरी तक देता है दर्द बुरा,

कैस जैसा किसी से तालुकात मत रखना,


बड़े जिगर वाले होते हैं जो चाहें वो पा लें,

न हो अगर तो पलकों पे ख्वाब मत रखना,


बड़ी तरह के लोग मिलेंगे निकलो दुनिया में,

हर किसी पे एक जैसा विश्वास मत रखना,


बिना किए ही कुछ मिल जाए ज़िंदगी में तो,

अक्सर होता है फरेब या तो फिर कोई सपना!

डॉकटर

खुश रहो, खुश रहो,

सदा सदा खुश खुश रहो,


ओ दुख दर्द दूर करने वालो,

जख्मों पे मरहम धरने वालो,

सांसों की डोरी टूटने को हो तो,

साथ किसी का छूटने को हो तो,

ज़िंदगी के लिए सामने आ के,

मौत से दो दो हाथ करने वालो,

धड़कने जो थमने लगे तो,

धड़कनों को ओ चलाने वालो,


खुश रहो, खुश रहो,

सदा सदा खुश खुश रहो,


हो जाए जो कोई यतीम,

रूठे हंसी, हर दिन गमगीन,

छूटे सब खेल खिलौने,

अधूरी रह जाए तालीम,

बेवक्त जो चला जाए,

किसी का जो जीवन साथी,

दिया जैसे बिन बाती,

उठ जाए रब से भी यकीन,

ओ यकीन को बचाने वालो,

ओ मेहरबान हंसी लौटाने वालो,


खुश रहो, खुश रहो,

सदा सदा तुम खुश रहो,


धुंधलाती आंखों को कर दो रोशन,

लड़खड़ाते पांव को दे दो ताकत,

देख सकें फिर से फ़ूल कलियां,

खेले जिन में चल सके वो गलियां,

बोझ सब पे बन जाने से राहत,

ढूंढ के ला दो खोई हुई रियाकत,

ओ खुद मुख्तयारी बचाने वालो,

ओ लाचारी से बचाने वालो,


खुश रहो, खुश रहो,

सदा सदा तुम खुश रहो,


घेर ले जो आ के कोई महामारी,

घरों में कैद अपने दुनिया सारी,

तुम्हीं मुंसिफ, तुम्हीं फिर वकील,

तुम ही से पेशी, तुम ही से अपील,

दिन रात रखो काम जारी,

अपने कंधों पे ले सब की जिम्मेदारी,

ओ हबीबो, ये तबीबो,

सब को जिंदाँ से रिहा करवाने वालो,


खुश रहो, खुश रहो,

सदा सदा तुम खुश रहो|

राहत

एक छोटी सी बच्ची 

जैसे खिलखिला रही थी,


बारिश के पानी के 

से बने छोटे से गड्ढों में,

उछल उछल के

जैसे छपाके लगा रही थी,


अपनी कुर्सी पे बैठे बैठे,

नीम के पेड़ पे डाली

हुई, पींग जोर जोर से 

जैसे झूले जा रही थी,


गीत जो उसको कभी

कोई जवानी में सबसे 

अच्छा लगा होगा,

मन ही मन जैसे वो

गाए जा राह थी,


अपने बच्चों को 

जो गा के लोरियाँ

किया होगा उसने बड़ा,

जेहन में उसके जैसे सब

लौट के आ रहा थी,


बड़ों दिनों के बाद

उन्हें देख के ऐसे लगा

किसी ने छोड़ दिया हो 

गला, और खुल के

वो जैसे सांस ले पा रही थी,


मुरझा सी गई थी

जैसे उन में ज़िंदगी,

आज देख के लगा

के जैसे उनमें फिर से

जान वापिस आ रही थी,


फिकर उनसे चली 

गई हो जैसे कोसों दूर,

उम्मीद उन्हें ज़िंदगी

के लिए फिर से जैसे

नजर आ आ रही थी,


एक अंधेरी तूफानी

खौफनाक, आंधी,

तूफान वाली रात

हो गई हो खत्म,

और दूर क्षितिज पे

सुबह होने जा रही थी,


अच्छा तो नहीं होता

अपने हमदर्दों का

यूं अचानक से 

साथ छूट जाना,

पर उनको सुकून में

देख के अपनी फिकर 

कम सता रही थी,


ज़िंदगी में हसीं

खुशी, सुकून,

चैन, से बढ़ के

और कुछ भी नहीं 

कायनात उनके जरिए,

जैसे मुझे पे भी ये

भेद खोले जा रही थी,


एक छोटी सी बच्ची 

जैसे खिलखिला रही थी।

हयात

हयात सफर के सिवा और कुछ भी नहीं,

आखिर सब की एक दिन तएशुदा यकीनन ही,


बस चलते जाओ कायनात के इस अजूबे में,

आगाज,अंजाम जिसका किसी को जाहिर नहीं,


न उलझना कभी इस पेचीदगी में क्यों है, क्या है,

सालों बर्बाद हुए हैं आया बंदे के हाथ कुछ भी नहीं,


हां बस कह गए हैं कुछ न कुछ सब इसके बारे में,

बना लो तुम भी अपने लिए खूबसूरत ख्याल कोई,


और ये ख्वाब, ये मंजिले, ये मनसूबे सब सराय हैं,

सुकून मिलेगा कभी कही किसी एक में रुक के नहीं,


ये रिवायत, ये रीति रिवाज, जो ठीक लगें तो ठीक,

बेवजह इनके बोझ के तले दबना और झुकना नहीं,


ये मज़हबी, ये सियासती लोगों की दलीलें,

होती अक्सर खुदगर्ज़ी के सिवा कुछ भी नहीं, 


इनको देखते रहना पर जरा थोड़ी दूरी से,

ज्यादा इनके पास आ इस में उलझना नहीं,


ये मोहब्बत, ये चाहत, ये उल्फत, ये रिश्ते नाते,

ये हैं एक बड़ी बुनियाद इसको हमेशा रखना सही,


चलो देखते हैं कल क्या फिजा नया रंग लाती है,

आज के लिए, जितना देखा सीखा उतना ही सही।

तरकीब बताओ

अपने ख्यालों से दूर जाने की तरकीब बताओ,

नहीं मिला उसे भूल जाने की तरकीब बताओ,


कोई कहे, दिल पे न लगे, तरकीब बताओ,

कोई ना कहे, दिल ना टूटे, तरकीब बताओ,


हसरतें जागे ही न दिल में, तरकीब बताओ,

ख़्वाब आए ही न आँखों में, तरकीब बताओ,


हर वक़्त रहे अपनी धुन में, तरकीब बताओ,

मिलें सब से रहे खुश अपने में, तरकीब बताओ!