शायद उसको मझसे कुछ उम्मीद ही न थी

बड़ा दुख हुआ उस की दाद
मिली जो जरा सी बात पे,
ये सोच के, के शायद उसको
मझसे कुछ उम्मीद ही न थी!

कुछ देर अभी तुझे और तन्हा चलना होगा

कुछ देर अभी तुझे
और तन्हा चलना होगा,
न रुकेगा तो यकीनन
तेरे साथ काफिला होगा,

सब डरते हैं अभी तो
घर से निकलने में भी,
नहीं कोई डर की बात
तुझे साबित करना होगा,

आसान क्यों हो सिर्फ ये
एक तेरी लड़ाई तो नहीं,
बाकी सब के लिए भी
अभी तुझे लड़ना होगा,

लोट मत आना ये सोच के
के कोई रहबर नहीं,
इन रास्तों का पैगम्बर भी
तुझे ही बनना होगा,

तेरे नक़्श-ऐ-पा पे
चलेगी दुनिया तेरे बाद,
ये तो तय है अगर तुझे
कुछ न भी हासिल होगा!

आदमी के लिए बस है आदमी

आदमी के लिए बस है आदमी,
महलों से तन्हा रोते गए राजा जी,
सह सके ने बाण एक विरह का,
वीर, पराक्रमी, सूर्यवंशी, चक्रवर्ती,
आदमी के लिए बस है आदमी....

राम जी को तो चलो वनवास हुआ था,
लक्ष्मण को तो उस त्रासदी ने न छुआ था,
फिर उन्होंने ने क्यों राज नगरी त्याग दी,
आदमी के लिए बस है आदमी.....

भरत के लिए तो सब अच्छा ही किया था,
राज उसके लिए माँ ने सुनिश्चित किया था,
फिर भी कहा उसे ही क्यों कुलटा कुल्छीनि,
आदमी के लिए बस है आदमी.....

पर कोई कैकयी इस बात को क्या जाने,
मंथरा मन के आगे रिश्तों का मोल न पहचाने,
अपने ही हाथों अपनी ग्रहस्ती उजाड़ ली,
आदमी के लिए बस है आदमी.....

साँझा सपना देखते हैं

चल चलते हैं साथे,
एक साँझा सपना देखते हैं,
कहा था मैंने उसे,

कुछ नहीं हासिल होगा,
एक दूजे को काट के,

पर वो माना ही नहीं,
ज़िद्द उसकी वही रही,

अब हम दोनो को
नचाता है ज़माना
अपने इशारे पे,

न उसे कुछ हासिल हुआ,
न कुछ मुझे!

कभी कोई फैंसला ही ना हुआ

ज़िन्दगी हमारे लिए बद दुआ,
या हम ज़िन्दगी के लिए बद दुआ,
बुहत सोचा दोनों ने बैठ कर,
पर कभी कोई फैंसला ही ना हुआ!

हाथ की हर रेखा पे मात ही मात,
तकदीर ने लिखी हर लम्हा काली रात,
कोशिशें फिर वो करे भी तो क्यों करे,
हारना जिसका पहले से ही हो तय हुआ,
ज़िन्दगी हमारे लिए बद दुआ....

कहते हैं ज़िन्दगी खेल कर्मो का सारा,
फिर भी इतना सब कुछ मैं कैसे हारा,
थे मेरे ही कर्म पिछले जन्मों में ऐसे,
या वो खेल बैठा मेरी किस्मत का जुआ,
ज़िन्दगी हमारे लिए बद दुआ....

पशेमाँ सब जैसे कोई गुना हुआ हो हमसे,
वो और बात जो वो चाहते थे न हुआ हमसे,
और मेरा भरम बदल रहा यकीन में,
चिराग मैं वो जो बस देता है धुआँँ,
ज़िन्दगी हमारे लिए बद दुआ....

दुआ से ही शुरुआत, दुआ पे ही खत्म होती है

दुआ से ही शुरुआत,
दुआ पे ही खत्म होती है,
खुदा से जब भी कभी,
आपके बारे में बात होती है!

न कहीं कोई रंज, न कहीं
कोई गिला, आइना-ए-दिल
पे देख आपकी तस्वीर,
चेहरे पे मुस्कराहट होती है!

मैं छेड़ के बैठ जाता हूँ
किस्सा आपका ही हर बार,
जब कहीं कभी भी,
फरिश्तों की कहानी आत होती है!

और पुरजोर अकीदत का दरिया
इस नाते के लिए रूह में बह रहा,
वो बात अलग है बात करते हुए
आपसे मुझे अभी हिचकिचाहट होती है!

दुआ से ही शुरुआत,
दुआ पे ही खत्म होती है.....

वहाँ तेरी नज़र के लिए मैं नहीं, यहाँ मेरी नज़र के लिए तू नहीं है

मिलता क्या तेरे शहर में नहीँ है,
मिलता क्या मेरे शहर में नहीँ है,
वहाँ तेरी नज़र के लिए मैं नहीं,
यहाँ मेरी नज़र के लिए तू नहीं है!