I don't know what religion is,
I don't know what leadership is,
I don't know what affection is,
I don't know what relationship is,
I just reach when my people need me.
I don't know what religion is,
I don't know what leadership is,
I don't know what affection is,
I don't know what relationship is,
I just reach when my people need me.
तुम्हें खबर नहीं है ऐ इंसानो,
किस अँधेरे की तरफ बड़े जा रहे हैं हम,
हश्र यूं लगता है जल्दी आएगा ,
अपने कर्मो के फल पाने वाले है हम,
चंद लोगों की मुट्ठी में
सिमट रहा है दौलत का समन्दर,
और समंदर भर लोग,
घुट घुट के जी रहे हैं अंदर ही अंदर,
दूभर हो रहा है दिन-ब-दिन
रहने के लिए एक छत्त जोड़ पाना,
और हिल गयी है बुनियाद जीवन की,
पुराने का जाना नए का आना,
मैं नक्शा देखता हूँ जब भी,
तन्हाईओं का तस्सवुर नज़र आता है उस में,
बस अपनी जियो और खत्म करो
यही मंज़र नज़र आता है हर शख़्स की आँखों में,
हमको कोई कुदरती आफत या
कोई इस ग्रह के बाहर की ताकत नहीं मारेगी,
ये नसल इंसानो की देखना
चंद लोगों की हविस के आगे हारेगी,
धरती के आखिरी इंसानों के नाम
अपने रहते हुए ये खत छोड़े जा रहा हूँ,
मैंने देख लिया था विनाश आते,
पर कुछ कर न सका हाथ जोड़े जा रहा हूँ!
Dressed in a monochrome,
She splashed like sunshine,
Today after so many days,
She felt like a poem in rhyme.
The girl I fell in love with,
The girl I want to live with,
Pouring life gently into my cup
From her tender moonlit eyes,
Rising like a daisy in the morning,
Settling like stars in the night,
She, when I see her pass by, makes
My heart ache in lover’s delight.
A gentle breeze
caressed both a pebble and a leaf
only one swayed.
A violent gust
buffeted both a pebble and a leaf
only one shuddered.
बीवियों की कट जाती है इंतजारी में,
आदमियों की रोजगार की मारा मारी में,
और बच्चों की इसी तैयारी में,
बस यही है ज़िंदगी और क्या कहूँ।
शहर अच्छा नहीं लगता जाओ गाँव लोट जाओ,
बेवजह नासमझ लोगों को रस्ते से न भटकाओ,
सो मुश्किलें है यहाँ तो हज़ार मुसीबतें वहाँ हैं,
तोलना ही है तो दोनों को साथ रख के बताओ,
जिसने तुम्हें काम दिया, नाम दिया, मुकाम दिया,
उसी को कहते हो बुरा, कुछ तो यारो शर्म खाओ,
सबको सुनाते फिरते हो अफ़साने खेत खलिहानों के,
है अगर हिम्मत तो ज़िंदगानी वही जी कर दिखाओ,
ये भी इंसानों की जगह वो भी इंसानो की है जगह,
और बड़े मसाइल है पहले ही तुम और न बढ़ाओ!
बेवक़्त करोगे तो खुद को लगेगा ये क्या गुनाह है,
कर लो काम वक़्त के हिसाब से जैसे वो बना है,
जवानी में देख लो जितनी भी दुनिया देखनी है,
पीरी में तो न दिखाई देता है ना जाता चला है,
छोटे दाओ तो बेख़ौफ़ हो के खेल लिया करो,
आखिर तो सब की तय और यकीनन फ़ना है,
जो भी मुश्किलें हैं शहर की थोड़ा सहन करो,
तुम्ही ने बदला है इसे, तुम्ही से ये ऐसा बना है,
दिल है जो नहीं हो सकता उसी तरफ भागता है,
चाहे तख्ती पे लिखा हुआ है अंदर आना मना है!