किसी न किसी को तो हर युग जाना होगा

 सब लोग ही कुछ न कुछ सहते हैं,

बस वो चुप रहते हम कह देते हैं,


वो मार के सब ख्याल जी लेते है,

हम है राह ढूंढ़ते जूझते रहते हैं,


पर मानव का पथ प्रदर्शन कैसे होगा?


गुट गुट के चुप चुप जीने वालों से?

या फिर लड़ते गिरते राह पाने वालों से?


क्या बुरा है जो मैं इस द्वंद्व में मारा जाऊं,

ये भी तो मुमकिन मुक्ति का मार्ग खोज लाऊं,


क्यों व्यर्थ मुझे रोकते हो,

क्यों व्यर्थ मुझे टोकते हो,


किसी न किसी को तो हर युग जाना होगा,

बन के बुद्ध जग के लिए लौट आना होगा!

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