तुम मेरे देश के हो

तुम मेरे देश के हो,

तुम मेरे देश के हो,


तुमने कसमें सिर्फ उठाई नहीं है,

तुमने कसमें निभाई भी है,

कर्म में धर्म को देखते हो..


मुश्किल कोई क्या रोके उनको,

ज़िद्द हो करने की जिनको,

किसी के आगे घुटने नहीं टेकते हो..


डर से लोगों ने, सिर को 

अब तक बुहत झुकाया है,

पर तुमने मान, सब अपने 

कर्म से कमाया है,

छत्रपति तुम स्वदेश के हो!

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