कोड़ियों के लिए करोगे
तो दो कोड़ी का काम करोगे,
रूह लगाओगे तो
दुनियाँ में नाम करोगे,
कल देखा मैंने दौलत को
ठुकरा के चले हैं फ़कीर,
कहते हुए, करनी है बंदगी?
या वज़ीरों को सलाम करोगे?
सुबह को शबनम, रात को सितारे
क्या क्या धरती सजाती नज़ारे,
तुम कभ कश लोगे सुबह का,
तुम कब दुपहर का जाम भरोगे,
ये फलक ये दश्त सब मौज में है,
न किसी तालाश ना किसी दोड़ में है,
बस के हैं तो है नज़ारे के लिए,
पाओगे सुकून जो इनसे नाता जोड़ लोगे!
No comments:
Post a Comment