इश्क़ बेहद पेचीदा है

 इश्क़ बेहद पेचीदा है, 

 ख़ुशबू-ख़ुशबू ज़ाहिर, 

 काँटे सब पोशीदा हैं। 


 जश्न-जश्न देख 

 सब लरज़ जाते हैं,

 पीछे तन्हाइयाँ रसीदाँ हैं। 


 ख़ाक हुई लैला, 

 मजनूँ हुआ कैस, 

 हर इक यही कहानी, 

 जितने इश्क़ क़सीदा हैं। 


 हम निकले हैं 

 जितनी बार इस राह पर, 

 हर बाज़ी हारी है, 

 नैना फिर भी 

 जाने क्यों ख़्वाबिदा हैं।

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