किसी की बेवकूफियां
और नुकसान हमारा हो,
चलो ये कोई नई बात तो नहीं,
जो भी हालात हैं उसी में गुजारा हो,
जो अपना अपना हमें कहते रहे,
कभी हाथ मिलाते रहे कभी गले लगाते रहे,
आज जो हो गया है उनकी
मतलब परस्ती का सच जाहिर,
चलो ऐसे लोगों से अब किनारा हो,
हर सच की हमेशा कीमत होती है,
हर हुकूमत सवाल करने वालों को सजा देती है,
हमने दोनों ही गुनाह एक साथ कर दिए,
क्यों न अब वो मिटाने पे आए हमें,
क्यों कोई भी दर्दमंद अब हमारा हो,
मोहब्बतों के गिलास में पीती है मतलब का जाम दुनिया,
चांदी के पन्नों में रख के बेचती है जहर की पुड़िया,
कितना कोई अपने आपको ऐसे में बचाए,
अच्छा नहीं था एक दो दोस्त बाकी सब से दूर रहना,
चलो फिर से अब वही पैराहन हमारा हो।