Written on the tune of Tere bina zidagi se koi shikvaa to nahin
तुम्हारे जैसा कोई और क्यों नहीं,
या मेरी नज़र ही देख ना पा रही,
अपना तो नाता भी न था करीब से,
ख्याल तुम्हारा क्यों जाता नहीं,
तुम्हारे जैसा कोई और क्यों नहीं।
आँखों में इस तरह बस गए हो,
साँसों में इस तरह गुल गए हो,
तुम हो के मैं हूँ मालूम नहीं,
तुम्हारे जैसा कोई और क्यों नहीं।
ये रात मेरी चाह की गवाह है,
पूछो तो कभी कहती क्या हवा है,
किसी और को माँगा ही नहीं,
तुम्हारे जैसा कोई और क्यों नहीं।
बूँदें बन के कभी बरस जाओ,
धुप सा छू कर निकल जाओ,
हमको अपने से दूर रखो नहीं,
तुम्हारे जैसा कोई और क्यों नहीं।
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